सरधने की ओर
अगर आप मेरठ से मंसूरी जाने वाली सड़क पर चल पडे़ तो आपको कम्पनी बाग़ के थोडा सा आगे , बाई तरफ एक बोर्ड दिखाई पडेगा । इस बोर्ड पर बडे–बडे अक्षरो में ‘सरधना’ लिखा हुआ है।यह निशान आपको सरधना जा रही 22 किमी0 लम्बी सडक की तरफ इशारा करता है। यह सडक तारकोल की बनी हुई है और इसके दोनों तरफ काफी हद तक छायादार पेड़ भी खडे है। 16 किमी0 सीधी चलने की बाद सडक गंगा नहर पर से उतरती हुई अपना रूख दाहिनी ओर कर लेती है। ये सड़क 1648 में बनी थी। सड़क के करवट बदलते ही अगर आप सीधे पेडों के बीच नजर दौडाये तो आपको सरधने के गिरजे की ऊंची – ऊंची लाटे आकाश में चुभती नजर आएंगी । यहॉ से सरधने केवल 6 किमी0 दूर रह जाता है। नहर के बाद से सड़क की दाई एक रजवाह सा खुदा है जो सरधने तक चला गया है। यह बेग़म ने इकट्टे बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए बनवाया था।

6 किमी0 का सफर तयकर सरधना कस्बा पहुचेंगे। कस्बे में घुस्ते ही आपको मकानों के उपर गिरजे का उपरी हिस्सा साफ दिखाई देगा। अगर आप यह से अपना मुंह बाई ओर फेरेतो आपको 200 गज दूर मुसलमानी ढंग से बने मकबरे दिखाई देगे। यह सरधने का काथलिक कब्रिस्तान है जिसकी देख भाल हमारी सरकार के पुरो विद्य–विभाग (Archeological Dept.) के जरिए की जाती है। इन्हीं कब्रों के नीचे बेग़म के बहुत से अजींज सुख की नींद सो रहे हैं।

आपको दाई ओर निगाह फिराने से सरधना–दौराला सड़क देखाई देगी। ‘दौराला’ की चीनी और मिठाई बहुत नामी है। 15 किमी0 दूर यह कस्बा सरधने से सबसे नज़दीक का रेलवे स्टेशन है। बहुत से लोग दौराले तक रेल में आकर वहां से बस में बैठकर सरधने आना ज्यादा बेहतर समझते है। दौराले और सरधने के बीच घण्टे–घण्टे के बाद मोटरे मिलती रहती हैं। हॉलांिक मेरठ सरधने से 22 किमी0 की दूर पर है पर फिर भी इस रास्ते पर मोटरें हर आधे घण्टे में मिल जाती हैं।

स्रधना पहुंच कर अब आप गिरजे जरने के लिए पक्की सड़क लेंगे। यह रास्ता दो बनावटी झीलों के पास से होकर गुजरता है। पहली दाई और दूसरी बाई ओर पडती है। दूसरी पहली से बडी़ है और जरा कुछ अन्दर को भी है। गिरजा बनने से पहले वहॉ की जमीन को ऊंचा उठाया गया था और इसके अलवा गिरजे की इमरात में गारामिट्टी भी बहुत खर्च हुई । इन दोनों के वास्ते मिट्टी पास के मैदान से खोदी गई जिसकी वजह से यह झीलों बन गई।

इन झीलों को पार कर आप जल्द ही गिरजे के अहाते की चार दीवारी के पास पहुंचेंगे यह सड़क से करीब–करीब सट कर ही चली गई है। चार दीवारी से गिरजे के अहाते का अन्दाजा लगाया जा सकता है। गिरजा बहुत पास है। इसलिए उसकी लाटें पास से और भी बडी दिखाई पडती है जिनके आस–पास खडे पेड़ भी पौडे से लगते हैं सड़क बाईं मुडी और आप चन्द मिन्तो में एक बडे लोहे के दरवाजे पर आ पहुंचें । यह दरवाजा हर वक्त बन्द रहता है मगर इसलिए की उसमें से कोई भारी गाडी होकर न गुजर पाए । भारी गाडीयों को अन्दर जाना मना है। अगर मोटर, गाडियों लगातार इस सडक पर आ जाने दी जायें तो यह रास्ता कुछ ही दिनो में खराब हो जायेगा।

छायादार पेडों की कतारो से सजी सडक के किनारे गिरजा है। दरवाजे पर से आपको इस खूबसूरत इमारत का नजारा साफ दिखाई देगा।

आप सरधना पहुंच चुके हैं। और बेग़म समरू के सरधने की यात्रा शुरू हो चुकी है।
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